My heart; it speaks a thousand words
Poems by Juhi
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Micropoetry
Saturday, June 16, 2018
ईद मुबारक
آج میرا کانہاں یہ دیکھ کر مسکرایا
سویّاں بنا کے میں نے, عید کا بھوگ لگایا
आज मेरा कान्हा ये देख के मुस्कुराया है
सिव्वयाँ बना के मैंने, ईद का भोग लगाया है
© जूही गुप्ते
Friday, June 15, 2018
Micropoetry
यूँ किया आखिर, सारी घड़ियाें को हटा दिया मैंने
कल-आज हुए बाहर, वक़्त को दफा किया मैंने
उतार फेंके नकाब-ए-झूठ,सच को सिया मैंने
रूह को ऐसे किया रफ़ू, और कुछ जी लिया मैंने
© जूही गुप्ते
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